घोस्ट हंटर (भाग-1)
आज के दौर में जब विज्ञान की पहुंच सामान्य जन-जीवन तक है, फिर भी लोगों का पारलौकिक शक्तियों पर यकीन करना थोड़ा हास्यास्पद लगता है। ऐसा क्या कारण है जो इंसानी मस्तिष्क भूत-प्रेत, आत्माओं या बुरी शक्तियों जैसी बातों को सच मान बैठता है? यह बातें सिर्फ मान्यताओं पर आधारित है जिन पर लोग परंपरागत तौर पर यकीन करते आए हैं। इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
भूत-प्रेत या नकारात्मक ऊर्जा एक अदृश्य शक्ति होती है जो कभी भी कहीं भी हो सकती है। इन चीजों को हम देख नहीं सकते लेकिन कुछ ऐसे संकेत हैं जो आपको यह बता देती है कि आपका घर और आपके आस-पास नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय है। इन्हें पहचानने के लिए आप काफी हद तक मशीनी तकनीकी कि सहायता ले सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि यह शत प्रतिशत कारगर हो।
मेरा नाम कल्पित जोशी है 5”3 कि औसतन हाइट, रंग गेहुवाँ, छरहरी काया वाला इंसान हूँ। मैने पिछले 7 सालों में मैंने अपने अद्वितीय काम कि शैली की वजह से एक अलग पहचान बना लिया है। सभी ने मुझे टीवी के माध्यम से दिल में जगह दी थी। मेरे शोज कई न्यूज के स्पेशल बुलेटिन में अपनी ज्ञान का परचम लहरा चुके थे।
मैंने कई जगह भूत प्रेत के रहस्यों से पर्दे उठाए थे। दरअसल यही मेरा पेशा है जिसकी वजह से लोग मेरे नाम से ही मेरे काम को जानते हैँ। मैं पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर का काम काफी वक़्त से कर रहा हूँ।
जहां लोग दिन में भी नहीं जाते मैं वहां रातों में रहता हूं। अच्छा लगता है, जब आप किसी ऐसे की मदद कर पाएं, जिसके पास इच्छाएं तो हैं लेकिन शरीर नहीं। आत्माओं की खोज करना (ghost hunting) करना ही मेरा मुख्य काम होता है।
मैने 2013 में अमेरिका के टेक्सास शहर से “पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर का कोर्स पूर्ण किया। इसके बाद मैने आसाम के मायोंग नामक जगह में अपना ऑफिस बनाया और कुछ लोगों के साथ मिलकर इंडियन पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर (IPAI) नाम से एक छोटी सी टीम बनाई।
मैंने अपनी टीम के तीन हिस्से किए, हर टीम में तीन सदस्य रखे। सभी टीम के अलग अलग काम मैने बाँट दिए। पहली टीम A इंटरनेट पर लोगों कि शिकायतें सुनती हैँ। ट्विटर, फेसबुक, ई-मेल और चिट्ठियों के ज़रिये से मिली हुई इनफार्मेशन को क्रॉस चेक करते हैँ। फिर उसकी पुष्टि होने बाद उन लोगों से या उस पत्ते पर रहने वाले लोगों से मोबाईल के मध्याम से सम्पर्क किया जाता है। कहने का मतलब यह है कि इनका काम केवल पैरानोर्मल ऐक्टिविटी कि इनफार्मेशन लेना और क्रॉस चेक करना ही होता है। यह सारा काम यहीं मायोंग के ऑफिस से ही होता है।
हमारी दूसरी टीम B में भी तीन ही सदस्य है और यहीं मायोंग के इसी ऑफिस से ही काम करती है। इनका मुख्य कार्य काला जादू और नकारात्मक ताकतों की जांच-पड़ताल करना हैं। अपनी सेवा देने के साथ ही लोगों से मिल कर उनकी परेशानियों को सुनती है। इस टीम का काम आत्माओं और इंसानों के बीच संपर्क स्थापित कर एक शांतिपूर्ण वातावरण का निर्माण करना है। पैरानॉर्मल गतिविधियों को सुलझाने के अलावा ये लोग योग, ध्यान सहित पूजा-पाठ पर जोर देते हैं। हालात बिगड़ने की स्थिति में ये लोग तीसरी टीम C की मदद लेते हैं।
हमारी तीसरी टीम C में ही मैं, कल्पित जोशी काम करता हूँ और टीम का हेड हूँ। हमारी टीम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की मदद से काम करने वाली ये विंग पैरानॉर्मल गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहस्य का उजागर करती है।
इंडियन पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर (IPAI) के अधीन काम करने वाले इस संगठन के सदस्य आधुनिक गैजेट्स से लैस हैं। हम लोग वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीके से भूत-प्रेत का पता लगाने के साथ ही लोगों को इस ऐसे कई कोर्स करवाते हैं, जिससे वो किसी अप्रत्याशित घटना से खुद का बचाव कर सकें।
आप मेरी इस टीम C को मिस्ट्री मशीन का इंडियन वर्जन भी कह सकते हैं। कई रहस्यों को सुलझाने के अलावा ये सोसाइटी कई स्कूल, घर और जगहों से भूतों को भगा कर उन्हें सुरक्षित कर चुकी है। मेरा और मेरी टीम का सबसे main work है आत्माओं की खोज (ghost hunting) करना। इंडियन पैरानॉर्मल एक्टिविटी इनवेस्टिगेटर में काम करते हुए हमें आए दिन कई दफे नए challenges से गुजरने होते हैँ। आत्माएं अपने होने का कोई न कोई संकेत देती हैं। जैसे फुल बैटरी दिखाता मोबाइल एकदम से लो हो जाए, कैमरा खराब हो जाए, लाइट बंद हो जाए या खटखटाने या दूसरी तरह की आवाजें होने लगें। इन संकेतों को पकड़ने के लिए हमें कई उपकरणों का सटीक इस्तेमाल करना आना चाहिए।
हमारे पास कई उपकरण हैं जो घोस्ट डिटेक्टर का काम करते हैं। मिसाल के तौर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर। इससे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी चेक करते हैं। ये फ्रीक्वेंसी उन तमाम जगहों पर होती है, जहां भी मोबाइल टावर या स्ट्रॉग वाईफाई राउटर या सड़क के नीचे तार जा रहे हों। बस फर्क ये है कि उन जगहों पर फ्रीक्वेंसी स्थिर होती है, जबकि जहां आत्माएं हों, वहां ये बदलती रहती है। बार-बार ब्लिंक करती है। हम हवा में सवाल करते हैं लेकिन डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर में जवाब कैद हो जाता है। अक्सर ये फुसफुसाहट होती है। कई बार गालियां, चीखें और रोने की आवाज भी आती है। नाइट विजन फुल स्पेक्ट्रम कैमरा, कंपास और वॉकीटॉकी होना जरूरी है। हर चीज फुली चार्ज्ड होनी चाहिए क्योंकि उस जगह अगर हकीकत में पैरानॉर्मल चीजें हैं तो वो सबसे पहले बैटरी ही खाएंगी।”
“साल 2016 की बात है। तब तक 15 से ज्यादा मामलों पर काम कर चुका था। कहीं कुछ नहीं मिला। यकीन था कि भूत-प्रेत बेकार की बात है। तभी देहरादून के किसी स्कूल में जाने का मौका मिला। दरअसल वह एक काफी पुराना और प्रसिद्ध स्कूल था, उसका नाम सैन्ट जोसेफ अकैडमी था। उसी स्कूल में हमारी टीम को बुलाया गया था। हमारी टीम साजो-सामान के साथ वहां पहुंची। हम एक TV शो का हिस्सा थे। मेरी टीम तकनीकी सामानों को सेटअप करने में लगी थी। मैंने तकनीकी चीजें चेक कीं और उस स्कूल के प्रिन्सपल से मिलने चला गया।
प्रिन्सपल ने मुझे काम शुरू करने से पहले काफी अहम जानकारी दी कि गर्मी कि छुट्टियों कि वजह से स्कूल बंद हो गया था और जब स्कूल खुला तो 2 nd क्लास में पढ़ने वाला 7 साल का बच्चा वहाँ मृत पाया गया था।
उस बच्चे के बारे में सभी जानते थे कि वह किडनेप हो गया है क्योंकि उसके पिता एक अच्छे बिजनेसमैन थे और उन्हें कुछ दिनों से फिरौती क लिए धमकी भी मिल रही थी। इस वजह से किसी ने भी यह नहीं सोचा कि वह बच्चा स्कूल में ही होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि वह ऊपर वाली मंजिल के जिस कमरे में जहां बच्चे की लाश मिली थी वहाँ आए दिन असामान्य घटनाएं घटित हो रहीं थीं। जैसे कभी बच्चों के लंचबॉक्स गायब होने लगे फिर देखते ही देखते कभी किसी का बैग हवा में 2 फुट ऊपर लहराने लगता। इस तरह से हर रोज कुछ ना कुछ अजीब दृश्य देखने को मिलने लगा।
स्कूल प्रबंधन ने यह decide किया कि यह सभी उसी बच्चे कि आत्मा कि वजह से हो रहा है। उस room को लॉक कर दिया गया। लेकिन उस समस्या का वहीं समाधान नहीं हुआ बल्कि उस बंद कमरे में आए दिन उठा पटक कि आवाज आती रहती थी।”
अगले रोज हम फिर वहां उस स्कूल में पूरी तैयारी के साथ पहुंचे। इस बार हमारी टीम बॉल और खिलौने लेकर गई थी। मैंने जैसे ही दरवाजा खोला और अपने machines & equipment’s के साथ थोड़ी हरकत करने के बाद मैंने कहा कि, “बच्चे यदि तुम वास्तव में इस कमरे में मौजूद हो तो हमें इसका एहसास करवाओ। यकीन मानो हम तुम्हारे नुकसान करने कि मदद से नहीं आए हैं?”
मेरा ऐसा कहना ही था कि वह बॉल हवा में उछलने लगी और बॉल खेली जाने खिलौने मूव करने लगे।
मैंने बच्चे की आत्मा से बात करने की कोशिश की। जब मैंने investigation किया तो पता चला कि उस बच्चे की भूख प्यास से बड़ी तकलीफ में मौत हुई थी। भूख लगने कि वजह से मौत हुई थी इस वजह से वह बच्चों के लंचबॉक्स खा जाता था। वह उन बच्चों के साथ खेलना चाहता था और इसी वजह से वह उनके बैग्स को हवा में उठाने कि कोशिश करता था।
उसे वहां से जाने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूजा-पाठ भी हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद फिर एक्टिविटीज शुरू हो गईं। बच्चों की आत्मा अमूमन बड़ी जिद्दी होती है और उतनी ही नासमझ भी। आप जो भी कहें, वो काफी हद तक समझ ही नहीं पाती हैं।
किसी व्यक्ति कि मृत्यु पूरी उम्र काटने के बाद हो तो वह आत्मा शांत रहती है। उसे कोई लालच नहीं होता और वो अपनी दुनिया में लौट जाती है।”
घोस्ट हंटर (भाग-2)
टीवी पर देखा होगा कि आत्माएं पूरे का पूरा घर हिला देती हैं। इंसानों को उठा-उठाकर पटकती हैं। सिर फोड़ देती हैं, दरअसल वो ऐसा कुछ भी नहीं करती बस वो अपनी मौजूदगी का एहसास करवाती हैं।
घोस्ट हंटिंग या पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन विज्ञान पर वो भी एक शानदार experience के साथ कुछ और बातें बताता हूँ। इसके कायदे फिजिक्स, मेटाफिजिक्स पर काम करते हैं। लेकिन तब भी ये इंजीनियरिंग या लेखकी या डॉक्टरी से अलग है। बाकी जगहों पर नाकामयाबी का डर रहता है और इसमें मौत का। जहां आप डरे, डर आपको निगल जाएगा।
पिछले महीने ही मसूरी से एक सॉफ्यवेयर इंजीनियर प्रिया भार्गव का मेल आया। उस मेल में फोन नंबर दिया गया। उनके पति कि मृत्यु heart attack से हुई थी। detail में बात हुई तो समझ आया कि उनकी बेटी कि छत से गिर के मृत्यु हो गई थी और उनकी बेटी रात को अक्सर अपनी मौजूदगी का एहसास करवाती थी। मुझे उन्होंने अकेले ही बुलाया था क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि आस पास या किसी को यह बात पता चले और उनकी बदनामी हो।
तो मैं फिर से अपनी पूरी तैयारी के साथ उनके घर पहुँच गया। मैने उस रात काफी कोशिश कि लेकिन मुझे इस तरह कि कोई भी हरकत नहीं दिखी। वो महिला भी काफी surprised थीं। मेरी वहाँ से वापसी कि टिकट्स 2 दिन बाद कि थी। तो थक कर मैं ऊपर बने गेस्ट रूम में सोने चल गया।
मुझे अच्छे तरह से याद है मैं सुबह जैसे ही बाथरूम में गया वहाँ सब कुछ सामान्य था। जब मैं नहा रहा था तो अचानक मुझे लगा जैसे वहाँ मेरे अलावा भी कोई मौजूद है। अचनाक वहाँ का तापमान एकदम से ठंडा हो चला। मैं समझ गया कि यहाँ कुछ अनहोनी होने वाली है। मुझे अक्सर ऐसे हालत में पूर्वाभास हो जाते थे।
मेरा अंदाज बिल्कुल सही निकला अगले ही पल लाइट झप झप हुई। थोड़ी देर बाद अचानक सारे बल्ब बुझ गए और वहाँ चारों तरफ अंधेरा हो गया। यह सब होने के बावजूद मैंने दिमाग से काम लिया क्योंकि मुझे पता था कि ऐसे हालातों में खुद को कमजोर नहीं करना चाहिए नहीं तो ये हम पर हावी हो जाते हैँ।
कुछ क्षण में ही वहाँ लाइट आ गई। मेरी नजर जब सामने mirror पर गई तो मेरी आँखें चौंधिया गई, सामने मिरर पर खून कि बूंदों से लिखा था ‘I will kill you Kalpit!’
यह पढ़ते ही मेरी हालत खराब हो गई। मैं कितना बड़ा ही ghost hunter क्यों न रहूँ लेकिन हूँ तो मैं भी एक इंसान ही। मैंने फटाफट अपने कमर पर towel लपेटा और वहाँ से चीखता हुआ भाग खड़ा हुआ।
मेरी आवाज सुनते ही प्रिया भार्गव भी ऊपर ही दौड़ी चली आ रही थी। मैं सीढ़ी पर उनसे टकरा गया और मेरी towel खुल गई। हम दोनों सीढ़ी से थोड़ी देर तक लुढ़कते रह गए। मैंने उठने कि कोशिश कि तो देखा कि मेरा towel खुल चुका था और टाउल प्रिया भार्गव के नीचे दबा हुआ था। उन्होंने हँसते हुए मेरा टाउल मुझे वापिस किया और मैंने वह झट से लपेट लिया। मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन यह सब इतने अचानक से हुआ था कि मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
तभी उनकी नजर मेरी गर्दन पर पड़ी। उन्होंने वहाँ हाथ लगाते हुए कहा,
“अरे यह खरोंच के निशान कैसा?” यह कहते ही उन्होंने साड़ी के पल्लू से मेरी गर्दन से वह खून पोंछा तो वे यह देखकर चौंक गई कि नाखून का निशान दिखा।
मैंने सारी बात उन्हे बाथरूम वाली घटना पूरी तरह से बता दी। उन्होंने मेरी पूरी बात सुनने के बाद कहा, “दरअसल मैं आपसे कुछ बात कहना चाहती हूँ, मुझे उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे। actually मैं अपनी बेटी कि मुक्ति करवाने से पहले एक बार उस से बात करना चाहती हूँ या एहसास करना चाहती हूँ।"
मैंने उनकी बातों को सुना फिर मुसकुराते हुए बोला, “मैं पक्के तौर पर तो नहीं कह सकता लेकिन मैं कोशिश जरूर करूंगा।” मेरा यह सकरात्मक जवाब सुनकर वह बहुत खुश हुई।
दिन के वक़्त मैं खाना खा के लेटे ही था कि मुझे ऐसा एहसास हुआ कि जैसे मेरा कोई गला दबा रहा है। मैंने बहुत कोशिश कि फिर बड़ी मुश्किल से मैं उस बेड से उठा और छत कि तरफ भाग पड़ा। वहाँ काफी देर तक मैं अपना सिर पकड़ कर बैठा रहा।
जीवन में हर घटना इंसान को कुछ न कुछ जरूर सिखाती है। इस घटना से मुझे यह पता चला कि हम आत्मा/आत्माओं से बात करने कि कोशिश करते है और उसे मनाते हैं कि वो जगह छोड़ दे तो वे बात करती हैं, इशारे देती हैं, इरादे जताती हैं। कई बार खूब कोशिशों के बाद भी वो जाती नहीं हैं। ये अक्सर बच्चों की आत्माएं होती हैं। ऐसे में हम उस प्रॉपर्टी को छोड़ देते हैं। ज्यादातर लोग पूजा-पाठ भी करवाते हैं लेकिन ऐसे मामलों में भी अगर आत्मा का बने रहने का मन है तो वो नहीं जाएगी।
मेरी अगली सुबह कि ही ट्रेन थी तो मुझे जो कुछ भी करना था वो आज कि रात ही करना था। मैंने शाम को ही सारी तैयारी कर ली थी। सारे सेटअप तैयार थे। रात ठीक 12 बजे पूरे कमरे कि lights अचानक ही झप झप होने लगी। मैं प्रिया भार्गव को ले कर उनके छत पर ले गया जहां मैंने अपने आधुनिक मशीन लगाया था। मैंने उन्हे वहाँ एक जगह शांति से बैठने को कहा।
मैंने उनसे उनकी बच्ची का नाम पूछा तो उन्होंने वंदना बताया। मैंने उस आत्मा से संपर्क साधने कि कोशिश कि और बोला, “वंदना, हम तुमसे बात करना चाहते हैं। यदि तुम हमें सुन सकती हो या देख सकती हो तो हमें जवाब दो।”
मेरा ऐसा कहना था कि अचानक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर ने signal रिसीव करने के संकेत दिए। मैंने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी चेक किया। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर उन जगहों पर फ्रीक्वेंसी स्थिर होती है, जबकि जहां आत्माएं हों, वहां ये बदलती रहती है, बार-बार ब्लिंक करती है। मैंने देखा कि बार बार फ्रीक्वेंसी बदल रही थी। वंदना कि आत्मा ने हमें अपनी मौजूदगी का एहसास करवा दिया था। मैं खुश होता हुआ बोला,
“प्रिया जी, वंदना हमारे ही आस पास है आप अपने सवाल उस से पुछ सकती है, लेकिन ध्यान रहे हमारे पास इसके लिए ज्यादा वक़्त नहीं है।”
प्रिया बोली, “बेटी, तुम्हें खोने का मुझे बहुत बड़ा अफसोस है। अब जो हो गया वह बदला तो नहीं जा सकता लेकिन मैं तुम्हें मृत्यु के बाद इस तरह से अशांत रहना और भटकना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मैं चाहती हूँ कि तुम्हारी सुकून के लिए कोई ऐसा काम करूँ जिसकी वजह से तुम्हें इस भटकने से मुक्ति मिल जाए।”
उनके बोलते ही उस मशीन में फिर से फ्रीक्वेंसी ऊपर नीचे होने लगती है। वंदना कि आत्मा हमें अपना जवाब दे रही थी। मुझे पता था कि इस process में हवा में सवाल किया जाता है, जिसे आम आदमी के सुनने के बस कि बात नहीं थी लेकिन डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर में जवाब कैद हो जाता है।
उसकी आवाज डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर में कैद हो चुकी थी। मैंने उसे देखने के लिए जैसे ही नाइट विजन फुल स्पेक्ट्रम कैमरा उठाया तो यह देखकर दंग रह गया कि नाइट विजन फुल स्पेक्ट्रम कैमरा और वॉकीटॉकी कि बैटरी खत्म हो चुकी थी। जबकि मैंने यह प्रोसेस करने से पहले सबकी बैटरी फूल कर ली थी।
मुझे अच्छे से पता था कि हर चीज फुली चार्ज्ड होनी चाहिए क्योंकि उस जगह अगर हकीकत में पैरानॉर्मल चीजें हैं तो वो सबसे पहले बैटरी खाएंगी। आत्माओं की टेंडेंसी होती है एनर्जी खाना। जहां से भी आसानी से मिले, रूह शरीर छोड़ती है तो उनका अलग ठिकाना होता है। कई बार वे अपने उस नए ठिकाने पर जाने को राजी नहीं होतीं। पुरानी जगह, पुराने लोग और पुराने इरादों के साथ बंधी रहती हैं। ऐसे में हम इंसानों को कम तकलीफ होती है, रूहों को ज्यादा।
वे देखती हैं कि हम बढ़िया खा रहे हैं, पहन रहे हैं, घूम रहे हैं, हंस रहे हैं, प्यार कर रहे हैं, पढ़ रहे हैं- वे भी सब करना चाहती हैं लेकिन कर नहीं पातीं। ये बहुत तकलीफ देता है। ऐसे में वो ध्यान खींचना चाहती हैं। बताना चाहती हैं कि वो भी यहां हैं, उनपर भी ध्यान दिया जाए। वे एनर्जी लेकर ताकत जुटाती हैं। दरवाजा खटखटाती हैं, सामान उठापटक करती हैं और आप डर जाते हैं।
तो अब बारी थी वंदना कि आत्मा की आवाज को सुनने कि जिसको हम डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर कि मदद से सुनने वाले थे। मैने जैसे ही उस रिकॉर्डर को प्ले किया तो उस बच्ची के रोने की आवाज आई और रोते रोते वह बोल रही थी, “मम्मी, मैं आपके पास आना चाहती हूँ, मुझे यहाँ से ले चलो। यहाँ मेरे साथ कोई खेलने वाला नहीं है।”
यह आवाज निःसंदेह उसी बच्ची कि थी लेकिन उसकी यह आवाज गूंज रही थी मानो जैसे दो शख्स एक साथ एक साथ बोल रहे हों। उसके इस जवाब को सुनते ही प्रिया के आँखों से आँसू बह चले। मैंने उसे शांत करवाते हुआ कहा,
“देखो हमारे पास ज्यादा वक़्त नहीं है, डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर के अलावा सारे मशीनों ने काम करना बंद कर दिया है। जल्दी से बात करो और समझदारी से पूछो कि वह क्या चाहती है?”
मेरा ऐसा कहते ही प्रिया अगले ही पल बोली,
“बेटी, तुम्हें खोने का मुझे बहुत बड़ा अफसोस है। अब जो हो गया वह बदला तो नहीं जा सकता लेकिन मैं तुम्हें मृत्यु के बाद इस तरह से अशांत रहना और भटकना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मैं चाहती हूँ कि तुम्हारी सुकून के लिए कोई ऐसा काम करूँ जिसकी वजह से तुम्हें इस भटकने से मुक्ति मिल जाए।”
प्रिया के कहते ही एक बार फिर से डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर कि frequency ऊपर नीचे हुई। मतलब साफ साफ जाहिर था कि वंदना ने उस बात का जवाब दिया था। जैसे ही उस रिकॉर्डर को प्ले किया वंदना कि आत्मा का जवाब फिर से आने लगा,
“मम्मी अगर मैं तुम्हारे पास नहीं आ सकती तो तुम मेरे पास आ जाओ! अगर यह भी possible नहीं तो मेरा pink colour वाला टेडी मेरे पास भेज दो। मुझे अकेला नहीं रहना, मुझे अच्छा नहीं लगता अकेले रहना।”
इस बार उसकी आवाज काफी भारी थी जैसे यह कहते वक़्त उसका गला भर आया हो। यह कहते के साथ वो रोने लगी थी। उसे रोते ही डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर कि बैटरी भी पूरी तरह खत्म हो गई थी। मैने प्रिया कि तरफ देखते हुए कहा,
“अब हमारी सारी मशीनें ठप्प हो चुकी हैं, बेहतर यही होगा कि हम उसके बताए हुए काम को पूरा करें। अभी रात के ठीक 2 बजे का समय हो रहा है। हमें हर हाल में इसे सूर्यास्त से पहले करना होगा।”
मेरी बात को सुनते ही प्रिया आशंकित भाव से बोली, “लेकिन हमें करना क्या होगा?”
उसकी बात सुनते ही मैं बोला, “हमे नहीं तुम्हें, पहले यह बताओ कि वंदना कि बॉडी कहाँ दफन कि थी।”
प्रिया बोली, “घर के पीछे काफी सालों से हमारा ही एक खाली प्लॉट पड़ा था, उसको वहीं दफनाया है।”
उसकी बात सुनके मैं बोला, “ठीक है मुझे वहाँ ले कर चलो।”
कुछ ही देर में हम जमीन खोदने वाले कुछ औजार के साथ, वहाँ पहुँच चुके थे। वहाँ चारों तरफ भयंकर अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। साख पर बैठे उल्लू के सिवा वहाँ दूर दूर तक हम दोनों के बीच कोई भी मौजूद नहीं था। हाँ वो बात अलग था कि मैने कभी किसी कि लाश के दफन होने के बाद छेड़खानी नहीं कि थी, लेकिन मेरा पेशा ही ऐसा था कि आत्माओं कि मुक्ति के लिए मैं कुछ भी कर सकता था। आज कि रात मैं कुछ वैसा ही करने वाला था। मैने पिया कि तरफ देखा और बोला,
“मैं जब तक जमीन खोदता हूँ तुम अपने घर में जाओ और वंदना जिस पिंक कलर कि टेडी के साथ खेलती थी उसे ले कर आओ।”
मेरे ऐसे दिशानिर्देश करते ही वह लगभग दौड़ के भाग पड़ी। अगले कुछ ही पलों में वो एक हाथ में लैम्प और दूसरे हाथ में पिंक कलर कि टेडी को ले कर वहाँ आ गई।
गड्ढा ज्यादा गहरी नहीं थी। उसके आने आने तक मैने वह गड्ढा खोद डाली था जहां वंदना कि बॉडी दफनाई गई थी। प्रिया कि नजर जैसे ही वंदना कि बॉडी पर गई, उसके हाथ से लैम्प और वह पिंक कलर कि टेडी हाथ से छूट जाती है। वह डर के मारे मुझसे यानि कि मिथिलेश गुप्ता से लिपट जाती है।
कुछ देर तक वह मेरे बदन से ऐसे लिपटी रहती है। मैं उसे समझाने कि कोशिश कि और उसे बोला, “देखो होनी को कोई नहीं टाल सकता और जाने वाले को कोई वापिस नहीं ला सकता। अब जो है ही नहीं उसका अफसोस मत करो और जल्दी से अपने हाथों से पिंक कलर कि टेडी बीयर को उसको सुपुर्द करो।”
मेरा ऐसा कहते ही उसने वैसा ही किया फिर मैंने फिर उस गड्ढे को मिट्टी से ढक कर उसे हमेशा के लिए बंद कर दिया। अगली सुबह में जब वापिस मायोंग आने लगा तो प्रिया ने मेरे साथ चलने कि इच्छा जाहिर कि, दरअसल उसे मेरा यह काम करने का अंदाज बहुत पसंद आया था। मुझे बताते हुए खुशी हो रहा है कि अब मैंने उनसे शादी कर ली है और वो अब मिसेज जोशी होने के साथ साथ Indian Paranormal Activity Investigator की भी हेड हैं।”
(देवेन्द्र प्रसाद)


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